मानसखंड मंदिर माला- उत्तराखंड

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अर्शदीप समर, जय हिंद    

उत्तराखंड को देवभूमि का दर्जा प्राप्त है। हिंदू धर्म के तमाम देवताओं का उत्तराखंड से नाता जोड़ा जाता है। धार्मिक दृष्टि से उत्तराखंड महत्वपूर्ण तो है ही, यहां की आय का प्रमुख साधन भी मंदिर हैं। धार्मिक पर्यटन स्धल के रूप में उत्तराखंड के विकसित होने से न सिर्फ लोगों को रोजगार मिलता है बल्कि सरकार के राजस्व में भी भारी वृद्धि होती है। उत्तराखंड के राजस्व का प्रमुख स्रोत मंदिर हैं।

आध्यात्मिक एवं धार्मिक रूप से उत्तराखंड को शिव की भूमि माना जाता है। गढ़वाल मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों को भगवान केदारनाथ की भूमि मानते हुए केदारखंड पुकारा जाता है। इसी तरह कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों को कैलाश मानसरोवर की जलभूमि मानते हुए मानसखंड कहा जाता है। मानसखंड में कैलाश मानसरोवर पर्वत, मेरू, पंचाचूली, लिपुलेख एवं जौहर मुख्य पर्वत हैं। काली कुमाऊं मानसखंड का अंतिम स्थल है। इस क्षेत्र में रामगंगा, सरयू, गोरी, काली नदी, पिंडर, कोसी नदियां हैं। राज्य सरकार ने मानसखंड मंदिर माला की परिकल्पना को जमीन पर लाने के उपक्रम शुरू कर दिए हैं। इसके तहत कुमाऊं मंडल के मंदिरों को बेहतरीन सड़कों से जोड़ना है। इसी को नाम दिया गया है मानसखंड मंदिर माला मिशन।

मिशन के तहत कुमाऊं मंडल के 29 पौराणिक मंदिर चिह्नित किए गए हैं। इन मंदिरों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए सड़कों का आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा ताकि जितने भी धार्मिक और पर्यटक स्थल हैं वहां जाने में पर्यटकों और श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से उत्तराखंड सरकार ने गढ़वाल क्षेत्र की चार धाम यात्रा की भांति कुमाऊं क्षेत्र के दिव्य मंदिरों को विश्व के समक्ष प्रदर्शित करने का लक्ष्य रखा है।

यह योजना मात्र मंदिरों के पुनर्निर्माण एवं विकास की योजना नहीं है वरन यह योजना कुमाऊं क्षेत्र में धार्मिक-आध्यात्मिक पर्यटन को एक नई दिशा देते हुए संपूर्ण उत्तराखंड के सांस्कृतिक आर्थिक विकास की योजना है। प्रकृति एवं संस्कृति के समन्वय से औषधीय उत्पादन, शिल्प कला, प्राकृतिक खेती, पशुपालन, आरोग्य आदि विशेष क्षेत्रों में प्रगति लाकर पर्वतीय क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जा सकता है।

 

Arshdeep Singh, Director The Summer News

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