एक छोटे से गांव से निकले प्रिंस सिद्धार्थ द्विवेदी की यह कहानी आपको भी जरूर पढ़नी चाहिए

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मेरा नाम: प्रिंस सिद्धार्थ द्विवेदी है।
मेरे गांव का नाम: ग्राम पोस्ट–कठवारिया जिला पन्ना तहसील गुन्नौर मध्यप्रदेश
पिता का नाम: bharat Kuamar
माता जी का नाम: deepika Dwivedi है।

मध्यप्रदेश (डेस्क): कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। ऐसा ही कुछ एक छोटे से गांव के रहने वाले प्रिंस सिद्धार्थ द्विवेदी ने कर दिखाया। उसने बताया कि वह एक छोटे से गांव का रहने वाला है। प्रिंस का कहना है कि वह अपने क्षेत्र में पहले ऐसे युवा हैं जिसने पढ़ाई के अलावा भी रास्ता चुना। उसने कहा कि वह गाने, रैप, शायरी, पोएट्री कंपोज करता है और खुद गाने और रैप भी गाता है।

 

 

उसने बतायाकि उसकी शुरुआत एक छोटी सी जगह से हुई। सागर में जब job कर रहा था। मेरे पिता ने मेरी काफी हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने मुझे हमेशा हौसला दिया, जिसके दम पर मैं आज कामयाब हुआ हूं। फिर सागर में मुझे कुछ ऐसे लोग मिले जिन्होंने मुझे motivate किया। आकाश अवस्थी जी, प्रिय शुक्ला जी, और दीपक जैन जिन्होंने मुझे रास्ता दिखाया इनका मेरे यहां तक पहुंचने में बहुत बड़ा हाथ रहा। जिंदगी में काफी उतार चढ़ाव लगे रहे, कितनो ने भरोसा तोड़ा, धोखा दिया। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। उसके बाद मैं ITS MOHAN NAGAR Ghaziabad आया, जहां मैं अभी मंदिर का पुजारी हूं।

 

यहां आने के बाद मुझे सही रास्ते तक पहुंचाने का काम आशुतोष शर्मा जी ने किया जो कि यहां के शिक्षक हैं। मैं open mic के बारे में नहीं जानता था, तब सर ने मेरी मदद की मेरी मुलाकात उनसे करवाई, जिन्होंने मुझे काफी कुछ सिखाया। मुझे हर कदम पर motivate किया, उनका नाम अग्रांशु दीप है और ये उन्हीं से सीखा की कब कहां क्या कैसा करना है। पहली बार अग्रांशु जी के oepn mic पर perform किया। आज मैं जिस मुकाम पर पहुंचा हूं सब उनकी ही मेहनत है। सब लोगों ने मेरा काफी साथ दिया। इनमें बहुत सारे लोगों का हाथ है। प्रिंस ने कहा कि मैं खुशनसीब हूं कि मेरे करियर को काफी लोगों ने ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

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