दिल्ली (एकता): दिल्ली में वैसे तो कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनका अपना खास महत्व है। यहां कई पुराने व अंग्रेजों के जमाने के किले आज भी मौजूद हैं। जो कि विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यहां एक से बढ़िया एक ऐतिहासिक विरासत देखने को मिलती है। जिनका अपना एक अलग ही इतिहास है। बता दें कि यहां पर ज्यादातर मुगल काल की इमारतें हैं, जो कि अपने आप में काफी सुंदर दिखती हैं। जिसका इतिहास लगभग 500 साल से भी ज्यादा पुराना है। आज हम आपको दिल्ली में स्थित एक ‘पुराना किला’ के नाम से है।

मीडिया सूत्रों के अनुसार इस ‘पुराना किला’ पहले इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। जो महाभारत में पांडवों की राजधानी रही थी। इसी कारण पुराने किले को अक्सर ‘पांडवों का किला’ कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक इस किले के अंदर जाने के लिए बड़ा दरवाजा है। इसी दरवाजे से ही आप अंदर जा सकते हैं। इसके दोनों ओर एक-एक विशाल बुर्ज हैं। जिनमें सफेद और धूसर-से काले संगमरमर की भराई हुई है। वहीं बुर्जों का निर्माण पत्थरों और मलबे से किया गया है।

राजधानी में बना पुराना किला अपने आप में इतिहास इकट्ठा किए हुए हैं। ये दिल्ली के उन स्थानों में से एक है, जहां पर्यटक सबसे ज्यादा घूमने के लिए आते हैं। यहां हर शाम शानदार लाइट एंड साउंड शो होता है, जिसे देखने के लिए दिल्ली एनसीआर के लोग दूर-दूर से आते हैं। इसे दिल्ली का सबसे बड़ा किला माना जाता हैं। खास बात यह है कि यह किला नई दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित है। इस किले का निर्माण शेर शाह सूरी ने अपने शासन काल में 1540 से 1545 के बीच करवाया था।

पुराने किले को महाभारत से जोड़ा जाता है। अगर आप भी पुराने किले में घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यहां अंदर जाने का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक है। क्योंकि रात होने से पहले-पहले इस किले को बंद किया जाता है। यह हफ्ते में खुला ही रहता है। आप जब चाहे इस किले में घूम सकते हैं। पुराना किला दिल्ली में होने की वजह से यहां आप आराम से जा सकते हैं। दिल्ली में वैसे घूमने के लिए काफी जगह हैं। लोग दूर-दूर से घूमने के लिए यहां आते हैं।
