दिल्ली (एकता): भारत में जितने धार्मिक स्थल हैं उनका अपना-अपना इतिहास और रहस्य हैं। कई धार्मिक स्थलों का राज छिपा ही रहता है। कोई अपनी खूबसूरती से सदियों पुराने आकर्षण और सुंदरता को समेटे हुए हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक खूबसूरत मकबरे के बारे में बताएंगे जो अपनी सुंदरता से सदियों पुराने आकर्षण को समेटे हुए है। हुमायूं का मकबरा दिल्ली में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है। ये दिल्ली में ‘हुमायूं का मकबरा’ नाम से जाना जाता है। दूर-दूर से लोग इसकी सुंदरता को निहारने के लिए आते हैं। यह 16वीं शताब्दी में बनाया गया था। लाखों अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक इसकी ओर आकर्षित हैं।

इस मकबरे की वास्तुकला ‘ताजमहल’ जैसी दिखती है। मकबरे बाहर से देखने में बेहद खूबसूरत है। यह मकबरा हुमायूं द्वारा नहीं बल्कि उनकी पत्नी हमीदा बानो बेगम ने अपने पति के प्यार में बनवाया था। हुमायूं का मकबरा ‘मुगल का छात्रावास’ भी कहा जाता है। एक ही परिसर के अंदर 100 मकबरे हैं। हुमायूं के मकबरे के अंदरूनी भाग समृद्ध और सुरुचिपूर्ण कालीनों और शामियाना से बने हुए हैं। अंदर टॉप पर एक छोटा सा तम्बू बना हुआ है, जहां आप हुमायूं की तल+वार, जूते और पगड़ी को उनकी स्मृति के प्रतीक के रूप में देख सकते हैं।

मकबरे के ऊपर स्थित गुंबद 42.5 मीटर लंबा है, जहां आप सीढ़ियों के जरिए ऊपर जा सकते हैं। बता दें कि मकबरे का डिजाइन और वास्तुकला आपको देखनी चाहिए, क्योंकि इसके प्लेटफॉर्म एक दूसरे के ऊपर आपस में जुड़े हुए हैं जो देखने लायक हैं। बताया जाता है कि यह मकबरा लगभग 8 सालों में बनकर तैयार हुआ था। इसके निर्माण में लगभग 1.5 मिलियन रुपए खर्च किए गए। हुमायूं के मकबरे का डिजाइन और वास्तुकला में ताजमहल जैसी है।

खास बात यह है कि यह लाल बलुआ पत्थर से तैयार किया हुआ है और इसके किनारों पर सफेद और काले रंग के संगमरमर का डिजाइन बना हुआ है। हुमायूं के मकबरे को यमुना तट के पास बनाया गया है।

भारतीय यात्रियों के लिए हुमायूं के मकबरे के लिए प्रवेश टिकट 35 रुपए है। यहां 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कोई टिकट नहीं है। गर्मियों में लोग मकबरे में कम आते हैं क्योंकि तापमान 42 डिग्री तक चला जाता है।
