दिल्ली (एकता): देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज अपना 65वां जन्मदिन मना रही हैं। बता दें कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार जन्मदिन मनाया और इस अवसर पर दिल्ली में भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। मीडिया सूत्रों के अनुसार आज हम आपको राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राजनीतिक सफर के बारे में बताएंगे। द्रौपदी मुर्मू को जीवन में कई संघर्षों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने एक अध्यापक से देश के सर्वोच्च पद तक काफी मेहनत से मुकाम हासिल किया। द्रौपदी मुर्मू सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है।

झारखंड की राज्यपाल रह चुकीं है द्रौपदी मुर्मू
जानकारी के मुताबिक प्रतिभा पाटिल के बाद दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने का द्रौपदी मुर्मू को सौभाग्य प्राप्त हुआ। बताया जा रहा है कि वह झारखंड की राज्यपाल रह चुकीं है। द्रौपदी मुर्मू का जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ था, जहां लड़कियों के लिए पढ़ाई करना सोच से भी पीछे था। उनके लिए ये सब करना आसान नहीं था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद एक टीचर से अपने करियर में आगे बढ़ी। उन्होंने काफी समय तक टीचर की नौकरी की।

शिक्षक से राष्ट्रपति पद तक का सफर
शिक्षिका रहते हुए द्रौपदी मुर्मू ने राजनीति की ओर कदम बढ़ाया। इतना ही नहीं उन्होंने भाजपा ज्वाइन करने के बाद 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत से पार्षद चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। ओडिशा में जब भाजपा और बीजू जनता दल गठबंधन की सरकार बनी तो वह वाणिज्य और परिवहन स्वतंत्र प्रभार मंत्री के पद पर तैनात रही। वह एक के बाद एक सीढ़ियां चढ़ती रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीएन ने 25 जुलाई, 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार चुना। वह सभी की उम्मीदों पर खरी उतरीं।
