खुशखबरी: केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही दर्शनों के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया दरबार

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दिल्ली (एकता): भारत में चारधामों में सबसे कठिन और मुश्किल यात्रा बाबा केदारनाथ की मानी जाती है। हर साल श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ इस यात्रा का हिस्सा बनते हैं। बता दें कि केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए गौरीकुंड से 18 किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़कर जाना पड़ता है। जिसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। कई श्रद्धालुओं की यात्रा के दौरान तबीयत भी खराब हो जाती हैं। इसके अलावा यात्रा से लेकर धाम में ऑक्सीजन की कमी से भी श्रद्धालुओं को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि उत्तराखंड में बाबा केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। आज यानि कि 25 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं।

पूरे विधि विधान और मंत्रोच्चारण के बीच खुले मंदिर के कपाट

बता दें कि आज सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर पूरे विधि विधान और मंत्रोच्चारण के बीच केदारनाथ के कपाट खुले। खास बात यह है कि कपाट खुलते ही 20 क्विंटल से ज्यादा फूलों से दरबार को सजाया गया। दरबार इतना खूबसूरत लग रहा था कि किसी भी श्रद्धालु की नजर नहीं हट रही थी। बता दें कि केदारनाथ के कपाट 6 महीने बाद खुले। जिसके चलते काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। जैसे ही कपाट खुले तो भक्तों की दरबार में भीड़ उमड़ पड़ी। केदारनाथ मंदिर के कपाट हर-हर महादेव के नारे लगाकर खोले गए। दूसरी तरफ मौसम खराब रहने के चलते श्रद्धालुओं को कपाट के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। बता दें कि 29 अप्रैल तक मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। दरअसल आने वाले कुछ दिनों में बारिश और बर्फबारी के आसार जताए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने रविवार को केदारनाथ के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण 30 तारीख तक के लिए बंद कर दिया है। श्रद्धालु बस गौरीकुंड, गुप्तकाशी, ऋषिकेश सहित कई जगहों पर भक्त रह सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल 27 अक्टूबर 2022 को केदारनाथ धाम के कपाट बंद हुए थे।

जानिए कब होते हैं केदारनाथ धाम के दर्शन

मान्यता है कि केदारनाथ मंदिर के कपाट 6 महीने के लिए बंद होते हैं लेकिन पुजारी मंदिर में एक दीया जलाते हैं। कड़ाके की ठंड में भी ये ज्योत वैसी ही रहती है जैसी पहली बार जलाई गई हो। 6 महीने बाद जब यह मंदिर खोला जाता है तो यह दीपक जलता हुआ मिलता है। कहते है कि मंदिर के कपाट बंद होने पर भगवान भैरव इस मंदिर की रक्षा करते हैं। वह इस मंदिर को हर बुरे तूफान और बुरी शक्ति से बचाते हैं।

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