समुद्र पर बना सबसे ‘खतरनाक’ ब्रिज, लहरों से टकराकर गुजरती है ट्रेन, कमजोर दिल वाले न देखें ये तस्वीरें

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दिल्ली (एकता): आजकल लोगों को बस, गाड़ी, प्लेन से ज्यादा ट्रेन में सफर करना अच्छा लगता है। ट्रेन से सफर के दौरान आप घने जंगल, घास के मैदान, नदी, पहाड़ आदि सहित कई नजारे देख सकते हैं। लेकिन दुनिया में कई ऐसे रेलवे ट्रेक भी हैं, जो प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ खतरों और रोमांच से भरे हैं। जरा सोचिए कि आप समुद्र के बीच बने एक ब्रिज से गुजर रहे हो। वो पुल किसी नाव के आने पर खुल जाता है और उसके जाने के बाद वापस बंद हो जाता है। आपको सोच कर कैसा लगेगा। हम बात कर रहे हैं भारत के सबसे अनोखे रेल रूट में से एक रामेश्वरम-पंबन ब्रिज रेल रूट की। ये 2009 तक भारत का सबसे लंबा समुद्री ब्रिज था। इससे ट्रेन जाती थी और ये काफी कम ऊंचाई पर जाती है। ये 100 साल पहले बना है। अगर समुद्र अशांत हो तो लहरें ऊपर तक आ जाती हैं। कमजोर दिल वाले इंसान को इन रूटों पर यात्रा करने से बचना चाहिए।

जानिए ब्रिज की खासियतें

इस खतरनाक ब्रिज की खासियत यह है कि आपको दूर से पानी नीला ही दिखाई देगा। ये ब्रिज 2.5 किलोमीटर लंबा है और 1 मीटर चौड़ा है। एक मिनट के लिए आपको ऐसा लगेगा कि ट्रेन पानी में चल रही हैं। ये एक एडवेंचर भरी यात्रा हो सकती है।

आपको बता दें कि यह ब्रिज 143 खंबों की सहायता से समुद्र पर टिका हुआ है। ये रामेश्वरम तक पहुंचने के सबसे प्रसिद्ध मार्गों में से एक है। इस रेल रूट पर सफर करने का सबसे अच्छा तरीका है रामेश्वरम चेन्नई एक्सप्रेस के जरिए। इस रूट से सफर करने से पहले आपको सोचने की जरूरत पड़ती है।

बता दें कि इस ब्रिज को बनाने की शुरुआत 1911 में हुई थी और इसमें से पहली ट्रेन 1914 में 24 फरवरी को हुई थी। ये 2007 में metre-gauge से broad-gauge में बदला है। इसे देखने और ट्रेन में सफर करने देश-विदेश से टूरिस्ट आते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस ब्रिज के नीचे से करीब 10 से 15 नाव हर महीने गुजरती हैं। जो नजारा देखने लायक है। कई लोग ट्रेन में सफर के दौरान खूब लुत्फ उठाते हैं। इसे जर्मन इंजीनियर Scherzer ने डिजाइन किया हुआ है।

कहा जाता है कि ये ब्रिज 1964 के चक्रवात को झेल गया था। ये वो समय था जब लोगों को लगता था कि न तो ये ब्रिज बचेगा न ही यहां से ट्रेन गुजर पाएंगी। इसके पास बने गांव धनुषकोडी को इस चक्रवात ने पूरी तरह से तबाह कर दिया था। इसी चक्रवात के दौरान एक बुरा ट्रेन एक्सिडेंट हुआ था। अब इस ब्रिज में सेंसर लगाए गए जो हवा को मापते हैं। जब कोई बुरा संकेत मिलता है तो ट्रेन को पहले से ही रोक दिया जाता है। अब कोई खतरा नहीं है।

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