दिल्ली (एकता): महिलाओं के लिए एक मिसाल है कि कुछ करने की कोई उम्र नहीं होती। यह सोच होना जरूरी है कि महिलाएं कुछ भी कर सकती हैं। हौसले उम्र के मोहताज नहीं होते, बस उन्हें उड़ान देनी पड़ती है। ऐसी ही एक मिसाल दिल्ली में 106 साल की उड़नपरी रामबाई और 95 वर्ष की भगवानी देवी महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। बता दें कि उड़नपरी रामबाई 50 से अधिक स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। अब वह अगली प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रही हैं। वहीं दिल्ली महिला आयोग रामबाई के इसी जज्बे को सलाम करने जा रहा है।

मीडिया सूत्रों के अनुसार 11 मार्च को उन्हें सम्मानित किया जाएगा। हैरानी इस बात की है कि जिस उम्र में उन्हें आराम करना चाहिए वह उस उम्र में 100 मीटर तक दौड़ लगाकर सबको हैरान कर देती हैं। खेतों में काम करना और वहां इतना चलना उनकी इस कामयाबी का राज है। वह सभी पीढ़ियों के लिए खासकर महिलाओं के लिए एक मिसाल है। जानकारी के मुताबिक हाल ही में वह मिदनापुर, कोलकाता व अलवर में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 100-100 मीटर की दौड़ लगाकर आई हैं। रामबाई पिछले साल गुजरात के वड़ोदरा में आयोजित राष्ट्रीय ओपन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर की दौड़ 45.40 सेकेंड में पूरी कर एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था।
भगवानी देवी के बाईपास सर्जरी के बाद भी इरादे बुलंद
