उत्तराखंड (एकता): उत्तराखंड के प्रमुख नगरों में से एक नगर है ‘ जोशीमठ ‘, जिसे ज्योतिमठ के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि यह उत्तराखंड के हरिद्वार-बद्रीनाथ मुख्य मार्ग पर स्थित है। इसका इतिहास करीब 1500साल पुराना है। 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य को यहीं ज्ञान प्राप्त हुआ और चार मठों में से पहले मठ की स्थापना उन्होंने जोशीमठ में ही की थी। जोशीमठ ही वह स्थान है जहां ज्ञान प्राप्त करने से पहले आदि शंकराचार्य ने शहतूत के पेड़ के नीचे तप किया था। ऐसी मान्यता है कि इस ज्योति के दर्शन मात्र से मानव जीवन का पाप समाप्त हो जाता है। लेकिन अब इस जोशीमठ का अस्तित्व खतरे में है। इस समय हजारों लोगों पर मौत का साया मंडरा रहा है।

मीडिया सूत्रों के अनुसार यहां सड़क, मकान, जमीन सब जगह दरारें आ गई हैं जो लगातार बढ़ती जा रही हैं। पूरे जोशीमठ में जमीन से पानी निकल रहा है। हैरानी की बात यह है कि करीब 561 घरों में दरारें आ चुकी हैं इसिलए यहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया गया है। इस तरह से नगर धीरे-धीरे अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अस्तित्व को खो रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो भविष्य में हम जोशीमठ को खो देंगे। बदरीनाथ जाने वाले तीर्थयात्री भी जहां होकर जाते हैं। यूं तो जोशमठ का धंसना कई साल पहले ही शुरू हो चुका है, लेकिन 2020 के बाद से समस्या ज्यादा बढ़ गई है।

फरवरी 2021 में बारिश के बाद आई बाढ़ से सैकड़ों मकानों में दरार आ गई। 1976 में तीन मई को इस संबंध में बैठक भी हुई थी, जिसमें दीर्घकालिक उपाय करने की बात कही गई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जोशीमठ शहर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं है। ग्लेशियर या सीवेज के पानी का जमीन में जाकर मिट्टी को हटाने से ऐसा हुआ है। प्रभावित परिवारों को शिफ्ट करने हेतु जिला प्रशासन ने एनटीपीसी व एचसीसी कंपनियों को एहतियातन अग्रिम रुप से 2-2 हजार प्री-फेब्रिकेटेड भवन तैयार कराने के भी आदेश जारी किए है।
