दिल्ली (एकता): उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भारत के सबसे प्रतिष्ठित पवित्र मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का इतिहास अपने आप में कई रहस्य छुपाए बैठा है। मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित, महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है। आइए जानिए इस मंदिर का इतिहास।

तीन हिस्सों में बंटा हुआ है महाकालेश्वर मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटा हुआ है। बता दें कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों को ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं। जहां आपको भगवान शिव के साथ ही गणेशजी, कार्तिकेय और माता पार्वती की मूर्तियों के भी दर्शन होते हैं। इस मंदिर में एक खास जगह यह है कि यहां एक कुंड में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं।

महिलाओं को आरती के समय करना पड़ता है घूंघट
उज्जैन को प्राचीनकाल से ही एक धार्मिक नगरी की उपाधि प्राप्त है। आज भी यहां भारी संख्या में दर्शन के लिए भक्त आते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो इस आरती में शामिल हो जाए उसके सभी कष्ट दूर होते हैं। इस मंदिर में जब कोई भी राजा या सीएम आते हैं तो वह यहां ठहरते नहीं हैं।

ऐसी मान्यता है कि यहां के राजा खुद महाकाल हैं, इसलिए जब कोई यहां शासक रूकता है तो उसकी सत्ता चली जाती है। इस मंदिर के कुछ खास नियम हैं। यहां महिलाओं को आरती के समय घूंघट करना पड़ता है। वह सीधे आरती को नहीं देख सकती। आरती के समय पुजारी को भी मात्र एक धोती में आरती करना अनिवार्य है।
