दिल्ली (अनिल कुमार): दिल्ली के रोहिणी में स्थित डीपीएस स्कूल के समर्थन में अब अभिभावक सड़कों पर उतर आए हैं। आगामी सत्र से स्कूल की मान्यता रद्द करने यानी बंद करने से अधर में लटका हजारों बच्चों का भविष्य। कुछ अभिभावक बढ़ती हुई थी इसके मामले को लेकर न्यायालय तक पहुंचे हुए थे और लगातार स्कूल का विरोध कर रहे थे। अब इस मान्यता रद्द करने के फैसले के बाद कुछ अभिभावक आगामी सत्र में अपने बच्चों को कहीं दूर के ब्रांच में भेजने को लेकर अभी से चिंतित हो गए हैं और स्कूल के समर्थन में उतर आए हैं।
स्कूल की मान्यता रद्द करने के खिलाफ स्कूल के बाहर एकजुट हुए अभिभावकों ने उठाई आवाज। सरकार और स्कूल के बीच चल रहा आरोप-प्रत्यारोप। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर। दिल्ली पब्लिक स्कूल के समर्थन में भी अभिभावक एकजुट हुए। अभिभावकों को मिल रहा है स्कूल टीचरों का भी समर्थन। राजधानी दिल्ली के डीपीएस रोहिणी स्कूल के बाहर आज अभिभावक एकजुट हुए ये अभिभावक इस बार स्कूल प्रशासन के खिलाफ नहीं बल्कि स्कूल समर्थन में खड़े हुए हैं। दरअसल स्कूल की मनमानी को लेकर अभिभावकों ने एकजुट होकर के एक शिकायत दी थी।
अभिभावकों के विरोध के बावजूद भी नियमों को ताक पर रखकर स्कूल की फीस बढ़ा दी गई थी। जिस पर कार्रवाई करते हुए इस स्कूल को ही बंद करने का फरमान दे दिया गया जिसके बाद अब बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ दिखाई दे रहा है। हजारों बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं अचानक से स्कूल बंद कर दिया जाए तो उन बच्चों का क्या होगा बच्चों के पढ़ाई कैसे होगी। बच्चे अब दोबारा एडमिशन कहां पर लेंगे। इन तमाम चीजों को लेकर अभिभावक परेशान हैं और आज एकजुट होकर स्कूल के साथ भी खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल को बंद करने के आदेश की बजाय यदि मनमानी करने से रोका जाता और जुर्माना लगाया जाता तो बच्चों का भविष्य भी संकट में ना होता। स्कूल को सबक भी मिलता और कार्रवाई करके अन्य स्कूलों के लिए भी यह कार्रवाई एक उदाहरण के रूप में देखी जाती लेकिन सीधे-सीधे स्कूल को बंद कर देना कहीं ना कहीं बच्चों की पढ़ाई और जिंदगी से खिलवाड़ जैसा है।