जनकपुरी (अनिल कुमार) : दिल्ली के जनकपुरी में वेस्ट जिले की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने 8 साल पहले अपहरण किए गए बच्चे को उसके परिवार से मिलाया। इस बच्चे का पंजाबी बाग इलाके से 2014 में अपहृत किया गया था और उसका अपहरण करने वाली एक महिला थी। वेस्ट जिले के डीसीपी घनश्याम बंसल से मिली जानकारी के अनुसार उस बच्चे का एक महिला द्वारा अपहरण किया गया था और कुछ दिन महिला ने बच्चे को अपने घर पर ही रखा। उससे मजदूरी करवाती थी जबकि कुछ दिन यहां रखने के बाद उसे बिहार ले जाया गया था, जहां उससे मजदूरी का काम कराया जाता था।
महिला के पड़ोसियों को कुछ शक होने पर उन्होंने बिहार पुलिस को इस बात की जानकारी दी। पुलिस टीम ने रेड भी किया लेकिन इस बीच पकड़े जाने के डर से आरोपी महिला बच्चे को लेकर फिर से दिल्ली आ गई। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन बने चाइल्ड में बच्चे को रख दिया। सप्ताह भर के बाद चाइल्ड होम से उसे जानकारी दी गई कि बच्चा वहां से भाग गया है लेकिन 15 दिन बाद उसी महिला को बच्चा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास ही घूमता हुआ मिल गया। वह फिर से उस बच्चे को लेकर वह एक बार बिहार चली गई। उसे वहां उससे कंस्ट्रक्शन का काम करवाने लगी इस बीच बच्चा एक दूसरी महिला के संपर्क में आया।
वह महिला रहती तो दिल्ली में थी लेकिन लॉकडाउन के वक्त बिहार गई हुई थी और वह महिला बच्चे को दिल्ली ले आई उस महिला ने काफी कोशिश की इस बच्चे को परिवार के पास पहुंचाने की। लेकिन पंजाबी बाग में उसके घर का पता नहीं चल सका। इसके बाद वह महिला बच्चे को जामिया पुलिस स्टेशन ले गई। इस बीच वेस्ट जिले के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम जिसमें एएसआई जयवीर हेड कांस्टेबल शीशराम और महिला कॉन्स्टेबल सुनीता शामिल थी बच्चे को ढूंढने के लिए अलग-अलग चाइल्ड होम में लगातार कोशिश कर रही थी। काफी कोशिशों के बाद बच्चे की सारी डिटेल मिली और तब बच्चे की परिवार तक उसे पहुंचाने में कामयाबी मिली। बच्चे को मिलाने मैं ऑपरेशन सेल के एसीपी अरविंद कुमार के निर्देशन में बनी पुलिस वालों की टीम ने काफी मेहनत की।