जानें किसने जलाई नालंदा विश्वविद्यालय, आखिर क्यों 800 से ज्यादा वर्षों तक खंडहर पड़ी रही ?

DelhiPosting1

बिहार 21 जून :  800 से ज्यादा वर्षों तक खंडहर में रहने वाली नांलदा यूनिवर्सिटी कभी भारत का वैभव हुआ करती थी। यहां दुनियाभर के करीब 10 हजार विद्यार्थी विद्या अध्ययन के लिए आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त वंश में हुई थी। इस वंश के शासक कुमारगुप्त ने 425 इसवीं से 470 इसवीं के बीच इसकी स्थापन की थी। यहां की प्राचीन पुस्तकालय में 3 लाख से ज़्यादा पुसतकों का संकलन था। 13वीं सदी में तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्लायल पर अपनी शक्तिशाली सेना के साथ हमला किया और इसे बर्बाद कर दिया।

करीब 800 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून को नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया। यह कैंपस प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। लंबे इंतजार के बाद इसे फिर पुराने स्वरूप में लौटाने की कवायदें हुईं और सरकारों ने इस पर काम किया। 2007 से तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पहल के बाद इसके निर्माण की रूपरेखा बनाई गई थी और आज नए कैंपस में 1 हजार 750 करोड़ रुपये की धनराशि से नए भवनों और अन्य सुविधाओं का निर्माण कराया गया है ।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *